मंगलवार, 9 फ़रवरी 2016

खेल.....

अपने अपने किस्म की......... "गुलामी" हो रही है
कहीं ........खेल खेल में "स्त्री" की
कहीं ....खेल के लिए "पुरुष " की नीलामी हो रही है

2 टिप्‍पणियां:

कनेर

"कनेर"  तुम मुझे इसलिए भी पसंद हो कि तुम गुलाब नहीं हो.... तुम्हारे पास वो अटकी हुई गुलमोहर की टूटी पंखुड़ी मैं हूँ... तुम्हें दूर ...