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बुधवार, 3 फ़रवरी 2016

लफ्ज़ .....

लफ्ज़..........

कुछ तेरे लफ्ज़ 
कुछ मेरे लफ्ज़ 
साथ चले
बात कहलाये

बातें करते लफ्ज़ ,
जुड़ गए 
जज़्बात कहलाये

जज्बातों में उलझे लफ्ज़ ,
थक गए 
खामोश कहलाये

ख़ामोशी में लिपटे लफ्ज़ ,
घुल गए 
आगोश कहलाये

आगोश में डूबे लफ्ज़, 
बह गए 
अदा कहलाये

अदा में रंगे लफ्ज़, 
छू गए 
अंदाज़ कहलाये

अंदाज़ में ऊँचे लफ्ज़ ,
गूंज गए 
आवाज़ कहलाये

आवाज़ में सच्चे लफ्ज़ ,
रुक गए 
विचार कहलाये

विचार में पक्के लफ्ज़ ,
मंझ गए 
व्यवहार कहलाये

व्यवहार में सिले लफ्ज़ , 
जड़ गए 
संस्कार कहलाये

संस्कार में चुभते लफ्ज़ ,
चिढ गए 
तिरस्कार कहलाये

तिरस्कार में लड़ते लफ्ज़ ,
गिर गए 
बेकार कहलाये

बेकार में कहे लफ्ज़ ,
बिखर गए 
चुप्पी कहलाये

चुप्पी में सारे लफ्ज़ खो गए 
फिर कहाँ कुछ कहलाये ?

लफ़्ज़ों का शोर थम गया

फिर ये किसने कहा ?
उड़ते लफ्ज़ जब बंध जाएँ ,
कल्पना कहलाये

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