रविवार, 7 फ़रवरी 2016

वह हर दिन........

वह हर दिन........

जिंदगी हर दिन नई करवट लेती है
कभी खुशी ,कभी गम की 
आहट देती है
होठों पर कभी ढेर हंसी , 
कभी हल्की मुस्कुराहट होती है
माथे पर कभी वाकई ,
 कभी बेवजह सलवट होती है

वह हर दिन बोझ सा , 
जब अंजाम में रुकावट होती है
वह हर दिन त्योहार सा ,
जब सफलता झटपट होती है
वह हर दिन मायूस सा ,
जब रिश्तों में खटपट होती है
वह हर दिन इम्तिहान सा ,
जब यारों में हट –हट होती है
वह हर दिन बहार सा ,
जब अहसासों की रुहानीयत होती है
वह हर दिन पाकीज़ सा ,
जब कुर्बान करने की हैसियत होती है
वह हर दिन नापाक सा ,
जब छलने की नीयत होती है
वह हर दिन साज़िश सा ,
जब जुठ्लाया जाय , जो असलियत होती है
वह हर दिन बुलबुला सा ,
जब चंद पल अपनों को दूँ ,सहूलियत होती है
वह हर दिन इंद्रधनुष सा ,
जब पुरानी तस्वीर रंगने की फुर्सत होती है
वह हर दिन अंगारे सा ,
जब जिगर का टुकड़ा छूटने से , दहशत होती है
वह हर दिन उधार सा, 
जब वही वही फिर फिर कर ,बोरियत होती है
वह हर दिन सुकून सा, 
जब खुद से बातें कर लें ,ऐसी तबीयत होती है
वह हर दिन सफल सा ,
जब जीत सिर्फ हमारे नाम ,वसीयत होती है
वह हर दिन तन्हा सा ,
जब वक़्त की हमें उजाड़ने की ,क़ुव्वत होती है
वह हर दिन तजुर्बे सा ,
जब ठीकरा फूटने से ,फजीहत होती है
वह हर दिन बचपन सा, 
जब बच्चों सी दिल में ,मासूमियत होती है
वह हर दिन आशीर्वाद सा ,
जब ईश्वर और माँ-बाप की ,इबादत होती है

सबका
अलग दिन अलग आज
अलग सुर अलग साज
अलग पहल अलग आगाज
अलग उम्मीद अलग परवाज़
जीने का अलग अलग अंदाज़
हर दिन –हर दिन कर 
रोज जान रहे हैं हम
इस छोटी सी जिंदगी के 
बड़े बड़े राज़

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