रविवार, 7 फ़रवरी 2016

आइना....

मुझमें.... हूबहू मुझ सा कोई और रहता हैं
ये अलग बात है कि ....
आइना मुझसे ये ......कभी कभी कहता है

2 टिप्‍पणियां:

कनेर

"कनेर"  तुम मुझे इसलिए भी पसंद हो कि तुम गुलाब नहीं हो.... तुम्हारे पास वो अटकी हुई गुलमोहर की टूटी पंखुड़ी मैं हूँ... तुम्हें दूर ...