रविवार, 7 फ़रवरी 2016

कुछ हाइकू.....

लाल सूरज
माथे पर टिकता
सागर है माँ

कच्ची सी उम्र
वसुधा की विदाई
ज़िद्दी मानव

कोरा कागज़
बिकती रोशनाई
बधिर सच

पराये शब्द
फेसबुकिया कवि
गूंगे लाइक्स

अजब शौक
अपहृत आखर
गुमनाम मैं

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हमेशा....

तुमने हर बार मुझे कम दिया और मैंने हर बार उससे भी कम तुमसे लिया। ना तुम कभी ख़ाली हुए .... ना मैं कभी पूरी हुई। हम यूँ ही बने रहें....हमेश...