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शनिवार, 13 फ़रवरी 2016

अच्छा लगा .....

मुठी भर लम्हों को .....
स्नेह की चाशनी में .....
भिगो कर
हथेलियों में धर देना   
"कॉफ़ी" में .....आज "चीनी " कम है 
कह देना ....… 
अच्छा लगा .....

अच्छा लगा ....
आज बस .....
पास से तुम्हारा 
गुज़र जाना 
 कुछ न कहना 
 बस मेरी आँखों में 
 नज़र आना   
अच्छा लगा ....

अच्छा लगा  ....
मुठी भर लम्हों में .....
आज मिलना ....
घुल जाना 
बस मुझमें.....ज़रा सा
 रह जाना 



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