रविवार, 14 फ़रवरी 2016

सुन हवा ....

सुन हवा !
ओह बरसाती हवा  ! 
 तेरी हर साजिश 
मुझे भिगाने की 
संग उड़ाने की
मुझे मिटाने की 
मुझे तरबतर कर देने की  
क़ुबूल है मुझे 
क्यूंकि तू 
उनसे रूबरू हो कर आयी है 
उनकी खुश्बू संग लायी है 
तेरे हर जर्रे में 
उनका एहसास सुनाई देता हैं 
उनका अक्स दिखाई देता है  
मुझे उन तक पहुँचाने की 
तेरी हर कोशिश 
हर साजिश 
मुझे क़ुबूल है  

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