शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2016

उस पार......

इक सिरा 
ख़्वाबों का 
भींचे बैठी हूँ 
इस पार.....
 दूसरा सिरा
अब भी 
तलाश रहा 
तुम्हें 
उस पार......

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मिलन......

भीग जाने के लिए मेरे पास पहाड़ बहुत थे ..... फिर तुम्हारी रेतीली आंखों से मिलना हुआ...