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रविवार, 31 जनवरी 2016

कलम.....

अक्षर अक्षर किताब करती है कलम
पेश ऐसे भी जज़्बात करती है कलम

हुश्न उसका भी कम कबीले गौर नहीं
ख़ामोशी में भी बात करती है कलम

कोरे कागज़ से उम्रों की आशिकी
लफ़्ज़ों की इफरात करती है कलम

संगदिल सनम भी बिखर जाये
जाने क्या खुराफात करती है कलम

इश्क़ भी मुझसे और इश्कियत भी
ज़र्रा ख़याल "क्या बात "करती है कलम

मुफ़लिस हो नहीं सकता हुनर इसका
हर सोच जवाहरात करती है कलम

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