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सोमवार, 25 जनवरी 2016

ढूँढ रही हूँ

बादलों में
कल्पना के चित्र
ढूंढ रही हूँ
सबको अजीब
खुद को विचित्र
ढूँढ रही हूँ .....

वो .....जज़्बा
वो..... जज़्बात ढूँढ रही हूँ
कभी खुद में
कभी दूसरों में
एक ......हालात ढूँढ रही हूँ 

वो...... प्यार
वो .....अधिकार
ढूँढ रही हूँ
कभी खुद में
कभी दूसरों में
एक ....व्यवहार ढूँढ रही हूँ

वो ....मजबूर
वो ......मजदूर
ढूँढ रही हूँ
कभी खुद में
कभी दूसरों में
एक .....मसरूफ ढूँढ रही हूँ 

वो.... मैं
वो ......आप
ढूँढ रही हूँ
कभी खुद में
कभी दूसरों में
एक..... सुर्खाब ढूँढ रही हूँ

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपके ब्लॉग पे पहला कमेंट करने भी मैं आ गया मैम ।
    ढूंढ रही हूँ ..बेहद अचछी रचना

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