रविवार, 31 जनवरी 2016

मैं अकेला" ....."अकेला मैं "

इतने बरसों में
उसने मेरा हाथ नहीं छोड़ा
सोचा की ........
"मैं अकेला "कहाँ जाऊंगा ?
और
आज इतने बरसों बाद
उसने मेरा हाथ छोड़ दिया
की देखें .......
"अकेला मैं "कहाँ जाऊँगा ?

"गज़ब " है ना हम भी !
"अजब " है ना हम भी !

बरसों में "सच "ही नहीं
"सोच "भी बदल लेते हैं

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

कनेर

"कनेर"  तुम मुझे इसलिए भी पसंद हो कि तुम गुलाब नहीं हो.... तुम्हारे पास वो अटकी हुई गुलमोहर की टूटी पंखुड़ी मैं हूँ... तुम्हें दूर ...