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रविवार, 31 जनवरी 2016

यहाँ कुछ टिकता क्यों नहीं?


यहाँ कुछ टिकता क्यों नहीं?

टिकती नहीं सफलता,
पाते ही बढ़ जाती है और पाने की मानसिकता

टिकता नहीं विश्वास,
दोनों में से एक है, दगाबाज़

टिकता नहीं भाईचारा,
उफ़ ये सोच ….इतना सा मेरा ,तेरा क्यों है इतना सारा ?

टिकती नहीं मुहब्बत ,
असमंजस में है, रिश्ता अपनाऊ या दौलत ?

टिकता नहीं वादा,
स्वार्थी फितरत है, जरूरत से ज्यादा

टिकती नहीं नज़र ,
आज झुकी है इधर , कल उठेगी उधर

टिकता नहीं वक़्त
कभी हरा भरा , तो कभी सूखा खाली दरख़्त

टिकती नहीं दोस्ती ,
सहना तो दूर ,देख भी नहीं सकती यार की उन्नति

टिकती नहीं मुस्कान ,
होठों पर धरता कम ,छीन ता ज्यादा है इंसान

टिकता नहीं रिश्ता ,
समय के साथ पकता जाता ,उम्र के साथ झड जाता

टिकती नहीं जवानी
चढ़ती सूरज की तरह, सूखती जैसे मरू में पानी

टिकते नहीं अश्क
 ख़ुशी में गीले , तो कभी गम में खुश्क

टिकती नहीं दौलत ,
आज है बेशुमार ,जाने कब पलट जाये किस्मत

टिकती नहीं जीत ,
आज तेरे यहाँ है , कल कहीं और होगा संगीत

टिकती नहीं हार,
वक़्त मरहम है , तो तजुर्बे दो धारी तलवार

टिकती नहीं यादें ,
परत दर परत बिछती जाती ,कब तक इनकों लादे

टिकती नहीं आदत ,
नयी लगते ही, पुरानी की उठ जाती मय्यत 

टिकता नहीं ईमान ,
है बहुत सस्ता ,खरीदता -बेचता इंसान

टिकती नहीं जुबान ,
फिसल -फिसल कर अब बची कहाँ इसकी पहचान?

टिकती नहीं प्रार्थना,
आज इसके लिए ,कल उसके लिए ,भगवान् बदल बदल होती याचना

टिकते नहीं जज़्बात ,
बस मौकापरस्त है , आज इस इंसान की जात


टिकती नहीं शर्म 
छोटे कपडे , बे अदब बातें , न कोई संस्कार , न धर्म


टिकती नहीं इच्छा 
दिमाग काबू में है नहीं , और दिल है भटकता


टिकता नहीं वजूद ,
जीवन भर कायम ,मृतक का नहीं कही मौजूद

और भी कई चीजें हैं जो टिकती नहीं ,
मेरी सोच और कलम भी टिकती नहीं ,
क्या आपको भी ऐसा सब लगता नहीं ,
आस पास ऐसा सब दिखता नहीं?
इसी लिए तो कहती हूँ यहाँ कुछ टिकता नहीं
टिकता है, तो रुकता नहीं !


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