रविवार, 24 जनवरी 2016

मैं ........

अथाह ......शब्द छोड के गयी थी
जब पिछली बार रुठी थी ...
तुम आज तलक....
" मैं "को .....चुने बैठे हो ......
its okay....
यही कहा था ना तुमने ...
मेरे जाते हुए .....

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हमेशा....

तुमने हर बार मुझे कम दिया और मैंने हर बार उससे भी कम तुमसे लिया। ना तुम कभी ख़ाली हुए .... ना मैं कभी पूरी हुई। हम यूँ ही बने रहें....हमेश...