शुक्रवार, 29 जनवरी 2016

लम्हे.......

कुछ एक ...छोटे छोटे लम्हे 
दबे पाँव 
चले आये मुझमें 
और 
इक गहरा सा बादल 
टिका गए मुझमें  ....
यादों का
मैं क्या कम थी .....
बटोरती रही 
हर जज़्बात 
हर एहसास 
इन रिस्ते लम्हों से 
और भीगती रही 
उम्र भर 
बस तेरे नाम की 
किश्तों वाली 
बारिश में 
कभी .....तरबतर हो कर 
कभी ....बस बूंद को छूकर
कभी ....खुद में खोकर  
 कभी ...बस खुद की होकर 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

यात्रा

प्रेम सबसे कम समय में तय की हुई सबसे लंबी दूरी है... यात्रा भी मैं ... यात्री भी मैं