रविवार, 31 जनवरी 2016

रिश्ते.....



दोनों की जरूरत हो तो रिश्ता बनता है ,
जरूरत पूरी होती रहे तो रिश्ता पनपता है 
जरूरत अधूरी रह जाये तो रिश्ता खिंचता है ,
क्या ये रिश्ता जरूरतें पूरी करने का जरिया है ?

ये कैसा रिश्ता है जो जरूरत से ज्यादा हम पर हावी है?
रिश्ता प्यारा है ,तो सहारा है . 
रिश्ता बेमेल है ,तो दूर किनारा है.
रिश्ता गर हम है ,तो राह आसान है 
रिश्ता गर मै है, तो चट्टान है

रिश्ता ऊलझ जाये ,तो जन्जाल है
रिश्ता टूट जाये, तो यादों का कन्काल है

रिश्ता लेना -देना है, तो हिसाब है
रिश्ता पुराना है, तो यादों की किताब है
रिश्ता अह्सास है, तो जीवन्त है
रिश्ता विश्वास है ,तो अनन्त है

रिश्ता निभ जाये, तो मर्यादित है
रिश्ता सिकुड जाये, तो सीमित है
रिश्ता थोपा जाये, तो बोझ है
रिश्ता जताया जाये, तो सन्कोच है
रिश्ता बोया जाये, तो जन्नत है
रिश्ता सीन्चा जाये, तो उन्नत है
रिश्ता काटा जाये ,तो कुन्ठित है 
रिश्ता कट जाये, तो हारा पथिक है
रिश्ता थम जये, तो बन्द सांस है
रिश्ता बह्ता जाये, तो जीने की आस है

रिश्ता मांगता है ,तो लालच है
रिश्ता अनकहा है, तो कोरा कागज है
रिश्ता बनवटी है ,तो शून्य है
रिश्ता सजावटी है ,तो न्यून है
रिश्ता इकतर्फा है तो ,आफत है
रिश्ता मनचाहा है ,तो चाहत है
रिश्ता सिसकता है, तो आगे तूफान है
रिश्ता भटकता है, तो दिल में उफान है.

रिश्ता संम्भल जाये, तो बनता गुमान है
रिश्ता अनचाहा है, तो बन्द जुबान है
रिश्ता नहीं ,तो तू अकेला है
इसमें बुना जिन्दगी का झमेला है
जिन्दगी में कई रिश्ते निभा रहे हैं
कभी टूटती ,कभी ऊल्झती,कभी जुडती,कभी यूंही रिश्तों की डोर में

रिश्ता संम्भल जाये, तो बनता गुमान है
रिश्ता अनचाहा है, तो बन्द जुबान है
रिश्ता नहीं ,तो तू अकेला है
इसमें बुना जिन्दगी का झमेला है
जिन्दगी में कई रिश्ते निभा रहे हैं
कभी टूटती ,कभी ऊल्झती,कभी जुडती,कभी यूंही रिश्तों की डोर में
बन्धे चले जा रहे हैं.

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Notes.....

Fantasy... One day I will rewrite myself  . Let me be you on this reincarnation  day . Skill.... Love uses its absence to be seen and to...