रविवार, 24 जनवरी 2016

मेरे "शब्द"......

मान तो रही हूँ ....
कि "जादू "ख़त्म हो रहा है मेरा
"बूढी "हो रही हूँ
पर कोई है ....
जो इस अभिव्यक्ति को ...
सिरे से नकार दे रहा
मानना तो छोड़ो ...
सुन भी नहीं रहा ....
अरे नहीं.... ये "तुम" नहीं हो !
ऐसा.... मेरे "शब्द"......
कह रहे हैं मुझसे
कागज़ ....
कलम....
रोशनाई का मेकअप स्ट्रोक्स
और ...
तुम्हारी कल्पना का मास्टर स्ट्रोक
मायावी है .....कल्पना !
रोज़ ...अलग ढब से
तैयार करते हैं मुझे.... ये शब्द
और ...
पेश करते हैं
कलम के चाहने वालों के बीच
फिर कुछ बोलते नहीं .....
सिर्फ सुनना चाहते हैं ...
तालियां .......
बची ख़ुची.. कमियां
सच ...
अब शब्द ही मेरी ...
खूबसूरती का राज़ है
खूबसूरत सोच में लिपटे
हमराज़ हैं
शब्द मुझे ....बुढाने नहीं देंगे
जादू बरक़रार रखेंगे मेरा
मुझमें "मैं "रखेंगे मेरे सरीखा

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