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सोमवार, 25 जनवरी 2016

कलम......

लफ्ज़ कतरा रहे
ख्याल लजा रहे
कलम शर्मा रही
कागज़ तर बतर हुए
अरसा हुआ .......
उन पर कुछ लिखे हुए
आज दिखे मेरी लेखनी
इश्क करते हुए
उनसे कुछ कहते हुए
" सिर्फ उनके "लिए बहते हुए

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