सोमवार, 25 जनवरी 2016

सफ़हे......

दिन के हर सफ़हे को .....पलट पलट के देखा 
सारी शाम को .....खरोंच खरोंच के देखा
इस रात को .......उधेड़ कर रख दिया 
हैरत में हूँ …
तुम कहीं नहीं मिले
नाराज़ हो क्या ?

  कल्पना पाण्डेय

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

यात्रा

प्रेम सबसे कम समय में तय की हुई सबसे लंबी दूरी है... यात्रा भी मैं ... यात्री भी मैं