शुक्रवार, 29 जनवरी 2016

देहलीज़.......

देहलीज़ के .....उस तरफ भी 
और ....इस तरफ भी 
कुछ अनकहे शब्द 
कुछ अनबूझे शब्द 
बीचों बीच .....
"कल्पना की दीवार "
हाँ .....वही  ....
तुम्हारे लिए "कांच "वाली 
मेरे लिए "आईने "वाली 

देहलीज़ ......साँझी  
शब्द .......अजनबी  
तुम ......सतत
और.....
मैं ..... ?
मैं.......अनवरत

कल्पना पाण्डेय

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