रविवार, 31 जनवरी 2016

मत पूछिये......

हम भी बैठे है ,इंतज़ार में उनके
नए नए खुदा हैं ,पहचान मत पूछिये

ईद होली दीवाली ,आज ही मना लो
पांच साल में ,क्या हो हाल मत पूछिये

इन अश्कों की दास्ताँ भी गज़ब है
पानी में दिल ,कैसे तैरता मत पूछिये

इस मजबूती से बंधा है मेरा वतन
क्या है डोर ,कहाँ है जोड़ ,मत पूछिये

इश्क़ का कलाम ,कुछ पल सूफी हुआ
किस कदर छा गया ,मत पूछिये

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मिलन......

भीग जाने के लिए मेरे पास पहाड़ बहुत थे ..... फिर तुम्हारी रेतीली आंखों से मिलना हुआ...