शनिवार, 30 जनवरी 2016

तुम.....

इक ......तुम ही हो 
जो ......मेरे लफ़्ज़ों की उदासी 
सोख सकते हो  
मेरे ......जाया हो रहे 
एहसासों को 
रोक सकते हो  
बस ....इक बार 
सिर्फ ....इक बार
मुस्कुरा दो ना......
कुछ लफ्ज़ बंधे हैं आज ....
मुदत्तों बाद
उन्हें उडा दो ना.....
बस ....जरा सी 
हवा दो ना .....

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

अद्धभुत हूँ मैं

खूबसूरत नहीं हूँ... मैं    हाँ ....अद्धभुत जरूर हूँ   ये सच है कि नैन नक्श के खांचे में कुछ कम रह जाती हूँ हर बार   और जानबूझ करआंकड़े टा...