सोमवार, 19 नवंबर 2018

यात्रा

प्रेम सबसे कम समय में तय की हुई सबसे लंबी दूरी है...

यात्रा भी मैं ... यात्री भी मैं

सोमवार, 12 नवंबर 2018

पूर्ण विराम

रुकने के लिए मेरे पास पूर्ण विराम भी था पर तुम ज्यादा पूर्ण थे....मेरे विराम के लिए।

लत...

कितनी भी उदासी लिख लूँ जाने क्यों तुम नहीं बनते...न तुमसे मिलने वाली बेचैनियाँ ।

तुम्हें कलम में भर लेना भूल है मेरी
पर क्या करूँ ?
यही  लत भी तो है मेरी।

चाख...

उसे कलम की नोंक से अपनी उदासियाँ सीना आ गया था।वो नीले रंग से छुपाकर रख लेती थी अपना प्रेम।

कुछ चाख रफूगर के नहीं रंगरेज़ के हिस्से भी आते हैं।

स्थगित प्रेम

फिर एक रोज़ प्रेम ने अपने लिए दो बैसाखियाँ ईजाद की और नाम रखा.....
"कहानी और कविता "
अब सब तक पहुँचने लगा है स्थगित प्रेम

रविवार, 11 नवंबर 2018

desires...

उसके पास पहुंचने के बहुत सारे रास्तों में लड़की हमेशा उस रास्ते को चुनती थी जहां से पल भर जी कर वो वापस लौट सके। ऐसा नहीं था की वो लड़के के  पास ठहरना नहीं चाहती थी पर वो शायद बार बार जीने को ज्यादा तवज्जो देती रही होगी  या फिर शायद ऐसा भी था कि वो एक दूसरे के लिए रुक जाने के लिए बने ही न थे। 

लम्स कितना खूबसूरत शब्द है और शायद उतना ही गहरा...ठीक ज़िन्दगी की तरह।
लड़की को शायद लम्स ही इकट्ठा करने का जुनून रहा होगा हमेशा से। इसी लिए लौटने की राह वो पहुंचने की राह से पहले mark करके रख लेती थी।

लड़के को इस बात की कभी हैरानी भी नही थी और न कोई शुबह था कि मुझसे लौटकर वो जाती कहाँ होगी और किस तरह बाक़ी ढ़ेर ज़िन्दगी गुज़ार देती होगी इस दिन रात के फेर में। उसकी मौजूदगी भर बस लड़के के सारे वजूद पर विराम लगा देती हो जैसे।उसकी गैरमौजूदगी में वो ज़िन्दगी पहन लेता था ...शायद कलाई पर या उंगलियों में ...ठीक से देख नहीं पाती थी लौटती लड़की।

बाजदफ़ा हम उसे ज़िन्दगी में सबसे अज़ीम जगह देते हैं जिसे हमारी खास जरूरत नहीं होती पर फिर भी हम उसमें अपनी तलाश रखते चले जाते हैं। ये तलाश एक रिश्ता बन जाती है। इसे जिस्मानी या खूनी रिश्ता कहना तो ठीक नहीं पर इसे हम शायद सुकूनी रिश्ता कह सकते हैं  ।
" इन रिश्तों की उंगलियाँ बेहद खूबसूरत हुआ करती हैं"। ये लड़की इसलिए भी कहती थी कि सुकून मौन भी उतना ही आरामदेह है जितना बयां किया हुआ।
उंगलियां छुअन से  ही नहीं ....लिख कर दिल भेजने से खूबसूरत हो जाती होंगी । लड़का इस बात पर हमेशा हँस कर कहता कि सुकून की उंगलियां नहीं नाखून सुंदर होते होंगे जो तुम मुझ पर गढ़ा जाती हो।
  बार बार बार बार एक ही पते पर भेजी जाने वाली चिठियाँ इबारत हो जाया करती हैं ....ऐसा लड़की सच करना चाहती थी। लिखती थी हज़ारों बार और भेजती थी लाखों बार।  पर लड़का लिख कर भूल जाया करता था।शायद इसलिए कि उसको लिखना पसंद था या फिर उसकी आदतों में शुमार था ऐसे लोग ढूंढ़ना जो उस तक पहुंच सके। उसे शब्दों की सीढियां बना देने की लत थी।
   लड़की जब से तलाश को ढूंढ रही थी तब से हर बार  हर बार उस लड़के तक पहुंचती रही थी ।शायद इसलिए भी कि अपनी desires के हरश्रृंगार ,अपराजिता, अमलतास, मोगरे और बुरांश सब एक साथ उसी सीढ़ी में उगा देने की ज़िद्द थी उस लड़की को। वो जानती थी की चाहनायें पंखुड़ियों से बनती हैं खासकर उसकी अपनी चाहनायें क्योंकि  वो मुस्कुराने और मुरझाने के अंतर को पाट लेना सीख गयी थी।
लड़का इस बात को मानता तो नहीं पर जानता जरूर था कि ऐसी लड़कियां होती तो बहुत हैं पर उस तक पहुंचती कम है। शायद इसीलिए वो अपनी उंगलियां खूबसूरत होने देता था  ....लिख कर नहीं..
जता कर नहीं..... बस मुस्कुराकर।  वो उस लड़की को आने देता था ... पास या करीब ? कौन जाने।

प्रेम सूरत से शुरू तो होता है पर आजमाइश सीरत की ही करता है ...ये अक्सर लिखा करता था लड़का और हर बार पढ़ा करती थी लड़की। उसके गालों पर पढ़ने वाले tippey अब और गहरे होने लगे थे।

  ये दोनों एक दूसरे में आबाद रहने के लिए बने हैं । उनका शाद होना तय है।


मंगलवार, 16 अक्तूबर 2018

हमेशा....

तुमने हर बार मुझे कम दिया और मैंने हर बार उससे भी कम तुमसे लिया।

ना तुम कभी ख़ाली हुए ....
ना मैं कभी पूरी हुई।

हम यूँ ही बने रहें....हमेशा

यात्रा

प्रेम सबसे कम समय में तय की हुई सबसे लंबी दूरी है... यात्रा भी मैं ... यात्री भी मैं